मंगलवार, 25 अगस्त 2015

सोनवा के पिंजरा में

लड़की की विदाई से जुड़े गीतों की बात करें तो पहली भोजपुरी फिल्म "गंगा मैया तोंह्के पियरी चढ़ाईबैं" के गीत जितना मार्मिक और सुमधुर गीत मुझे कोई नहीं लगता.

इस गीत के बोल बहुत ही मर्मस्पर्शी हैं और रफ़ी साहब ने गाकर इस गीत को अमर बना दिया है.

गीत के बोल हैं -

सोनवा के पिंजरा में बंद भईल हाय राम
चिरई के जियरा उदास
टूट गईल डालियाँ छितर गईल छोटबा
छूट गईल नील रे आकाश
सोनवा के पिंजरा मां ...

छल\-छल नैंना निहारे चुपके रही
चलली बिदेसवा रे मईया के दुआर \-२
आँसुओं के मोतियाँ निसानी मोरे बाबुला \-२
धारी गईनी हमको रे पार
सोनवा के पिंजरा मां ...

छल\-छल रह गईली संग कि सहेलियाँ
ले गई बाँध के निठुर रे बहेलिया \-२
मोरे मन मितवा भुला दे अब हमरा के \-२
छोड़ दे मिलन की तू आस
सोनवा के पिंजरा मां ...

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